आज समय है ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान को श्रद्धांजलि देने आज ही के दिन उन्होंने देश कर लिए अपना सर्वोच्च बलिदान किया था।
ब्रिगेडियर उस्मान को 1947-48 की पाकिस्तान के खिलाफ लड़ी गई पहली कश्मीर की लड़ाई में महावीर चक्र मिला था। ऐसा क्या था इस शूरवीर में, आईये मैं आपको बताता हूँ। दरअसल, जिन्नहा इनकी बहादुरी से इतने प्रभावित थे के उन्हें पाकिस्तानी सेना में सेना प्रमुख का पद ऑफर कर दिया जिसे ब्रिगेडियर उस्मान ने ठुकरा दिया और भारत माँ की सेवा का निर्णय ले लिया और पाकिस्तान की सेना के नौशेरा (जम्मू के पास) में छक्के छुड़ा दिए।इन्होंने प्रण लिया था की जब तक पाकिस्तान को खदेड़ नहीं देंगे तब तक ज़मीन पर ही सोयेंगे।
इन सब बातों से चिढ़ कर कर जिन्नहा ने इनका सर काट कर लाने वाले को 50000 का इनाम घोषित कर दिया। पर इस शेर ने हार नहीं मानी और पाकिस्तान को नौशेरा से खदेड़ दिया। इसी वजह से इनको नौशेरा का शेर भी कहा जाता है।
ब्रिगेडियर होने के बावजूद इन्होंने सैनिकों के साथ युद्ग लड़ा और वीरगति को प्राप्त हो गए। इनके जनाज़े में तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू और अबुल क़लाम आज़ाद भी शरीक हुए। दिल्ली में करीब चार वर्ष पूर्व इनकी कब्र को तलाशने में थोडा वक़्त लगा पर आख़िरकार ढूंढ लिया और अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किए। इनकी कब्र दिल्ली मेट्रो के जामिया स्टेशन के बिल्कुल करीब है।
ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान की शहादत को देश हमेशा याद रखेगा। ऋणी राष्ट्र का इस महान सपूत को शत् शत् नमन्।