आज पूरा देश लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की जन्म जयंती मना रहा है। सरदार पटेल का जन्म 31 अक्तूबर 1875 को अपने ननिहाल गुजरात के नाडियाड में हुआ था, पर उनके जीवन के आरम्भिक कई सारे वर्ष आनंद ज़िले में “करमसद” नामक स्थान पर बीते।
आज मैं आपको उनके मेमोरियल व उनके घर के दर्शन करवा रहा हूँ, जहां उनका लालन पालन हुआ। अप्रैल 2018 में मुझे इस पवित्र स्थान के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। ये तो आप सभी जानते हैं कि जब भारत को आज़ादी की सौगात मिली तो देश 565 रियासतों में बंटा हुआ था और फिरंगियों ने सभी रियासतों को अपनी इच्छा अनुसार भारत या पाकिस्तान में विलय होने की आज़ादी दे दी थी। सभी देशवासी सरदार पटेल के सदैव ऋणी रहेंगे क्योंकि उनकी दृढ़इच्छा शक्ति की वजह से ही सभी 565 फ़ूल एक टोकरी में एकत्रित हो पाए और हमारे स्वर्णिम भारत का निर्माण होना संभव हो पाया।
इस कठिन कार्य का निष्पादन निश्चित तौर पर अत्यंत कठिन था पर ये सरदार की दूर दृष्टि, सूझ बूझ और दृष्ट इच्छा शक्ति का ही परिणाम था के हमारे राष्ट्र का निर्माण हो पाया, वर्ना अंग्रेजों ने तो जाते जाते भी हमें प्रताड़ित करने में कोई कसर नही छोड़ी थी। इस महान विभूति को शत शत नमन।
जय हिंद।