कच्छ का रण – काला डूंगर का चुम्बकीय क्षेत्र

मित्रों, नमस्कार!!!

आज मै आपको कच्छ के काला डूंगर क्षेत्र में ले कर चलता हूँ जो कच्छ के रण क्षेत्र का सबसे ऊँचा स्थान है. इसकी ऊंचाई समुद्र तल से 462 मीटर है और ये भुज से करीब 97 किलोमीटर की दूरी पर है. यहाँ रास्ते में एक चुम्बकीय क्षेत्र है जहाँ गाडी को न्यूट्रल कर के छोड़ दो तो अपने आप चलने लगती है. पहले तो हमें यकीन ही नहीं हुआ पर जब स्वयं कर के देखा तो अचंभित होना पड़ गया.

दत्तात्रेय मंदिर जाते हुए रास्ते में ये स्थान पड़ता है. हमारी गाडी को सुरक्षा अधिकारीयों ने रोक दिया क्योंकि हमारे ठीक आगे आसाम के राज्यपाल श्री पी बी आचार्य चुम्बकीये क्षेत्र का जायज़ा ले रहे थे वो भी गाडी के साथ. पहले तो हमने भी सोचा की गाडी सिर्फ ढलान पर चलती होगी, पर हैरानी तो तब हुई जब गाडी थोड़ी चढाई पर भी अपने आप चल रही थी.

भारत में ये ऐसा दूसरा स्थान है, पहला है लेह में जो मैग्नेटिक हिल कहलाता है और ये लेह से कारगिल जाते हुए आता है. ये अपने आप में किसी अजूबे से कम नहीं है.

कहते हैं दत्तात्रेय मंदिर 400 साल पुराना है. यहाँ चावलों का प्रशाद तैयार किया जाता है जो यहाँ के सियारों (jackal) को खिलाया जाता है.यहाँ दत्तात्रेय मंदिर में ईश्वर को नमन किया, श्री आचार्य से मुलाकात की और वहीँ से इंडिया ब्रिज को देखा जो की पाकिस्तानी सीमा तक जाने का अंतिम स्थान है. इस ब्रिज से आगे जाने की इजाज़त आम नागरिको को नहीं है केवल BSF के सैनिक ही जा सकते हैं. आप जब भी कच्छ का रण जाए तो यहाँ अवश्य पधारें.

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