करतार सिंह सराभा का जन्म 24 मई 1896 को पंजाब के लुधियाना ज़िले के सराभा गाँव में हुआ था। वे बचपन से ही देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत थे। उच्च शिक्षा के लिए वे अमेरिका गए, जहाँ उन्होंने कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान ग़दर पार्टी से जुड़कर स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भाग लिया।
उन्होंने ग़दर आंदोलन के तहत भारत में अंग्रेज़ों के खिलाफ सशस्त्र क्रांति की योजना बनाई और 1914 में भारत लौटे। यहाँ उन्होंने ब्रिटिश सेना में विद्रोह फैलाने की कोशिश की, लेकिन योजना विफल हो गई और उन्हें 1915 में गिरफ्तार कर लिया गया। लाहौर षड्यंत्र केस के तहत उन पर मुकदमा चला और 16 नवम्बर 1915 को मात्र 19 वर्ष की उम्र में उन्हें फाँसी दे दी गई।
करतार सिंह सराभा की वीरता और बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन गया। शहीद भगत सिंह उन्हें अपना आदर्श मानते थे। उनका नाम आज भी देशभक्ति का प्रतीक माना जाता है और वे युवाओं के लिए एक अमिट प्रेरणा हैं।