एक अरसे के बाद कल शाम मुझे मोहन राकेश जी के एक विख्यात नाटक “आधे अधूरे” देखने का अवसर प्राप्त हुआ। अभिनय मुझे शुरू से ही अत्यंत आकर्षित करता है। मेरी अभिनय की यात्रा की शुरुआत वर्ष 1986 में मेरे पहले नाटक “अमीबा” से हुई, जिसमें मुझे एक बाल कलाकार की भूमिका मिली थी, उसका मंचन मंडी हाउस में ही श्री राम सेंटर में हुई थी। जब भी कोई नाटक देखता हूँ तो बीते वक्त में पहुँच जाता हूँ।
खैर ! आधे अधूरे के पात्रों ने अपनी सशक्त अभिनय क्षमता से मन मोह लिया। कल के नाटक की विशेष बात ये रही की जिन दो प्रमुख पात्रों ने वर्ष 1992 में इसकी शुरुवात की कल भी मुख्य भूमिकाओं में वही दोनों थे। वैसे मुख्य कथानक पात्र की भूमिका ओम पुरी और मोहन आगाशे जैसे दिग्गज अभिनेता भी निभा चुके हैं।
वैसे भी ये वर्ष मोहन राकेश जी का जन्म शताब्दी वर्ष चल रहा है। नाटक के बाद दिवंगत मोहन राकेश जी की पत्नी का संबोधन काफ़ी भावनात्मक रहा, सुन कर अचरज लगा जब उन्होंने कहा की आधे अधूरे उन्ही के परिवार की कहानी है। अभी इसके कई शो आने वाले हैं आप भी आनंद ले सकते हैं।